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विटामिन-के की कमी से होने वाली बीमारियां कई बार इलाज के बाद भी नहीं होती ठीक, जानें- कैसे करें बचाव

रांची 13 फरवरी 2021 City On Click:

आमतौर पर लोग शरीर में अलग-अलग विटामिन्स के प्रति जागरुक नहीं रहते जिसकी वजह से शरीर में कई विकार जन्म लेते रहते हैं।खासतौर पर शरीर में किसी एक विटामिन की कमी से ऐसी समस्या उत्पन्न हो जाती है, जो कई बार तो इलाज कराने के बाद भी ठीक नहीं होती।आज हम आपको शरीर में विटामिन-के की कमी से होने वाली समस्याएं बता रहे हैं-

विटामिन –के के फायदे

-विटामिन-के शरीर में रक्त के प्रवाह को बनाए रखता है। यह रक्त जमने की प्रक्रिया में शामिल जीएलए प्रोटीन, मिनरल और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों को सक्रिय करके शरीर में रक्त का जमाव होने या थक्के बनने से रोकता है।

-विटामिन-के चोट लगने पर बहते रक्त को जमने में मदद करता है, जिससे अधिक रक्तस्रव नहीं होता और किसी अनहोनी से बचा जा सकता है।

-विटामिन-के अस्थि घनत्व में भी सहायक है। हड्डियों में कैल्शियम और दूसरे खनिज लवणों को पहुंचा कर मजबूती प्रदान करता है। इसके सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा कम रहता है। विटामिन-के की कमी से जरूरी कैल्शियम रिस कर धमनियों में पहुंच जाता है, जिससे अस्थि-क्षय का खतरा रहता है।

-नियमित रूप से विटामिन-के लेने से हृदय रोग होने का खतरा कम रहता है। यह कोरोनरी धमनियों में प्रोटीन की आपूर्ति करने के साथ उसके आसपास एक लेयर बना देता है, जिससे धमनियों में कैल्शियम को जमने से रोकने में मदद मिलती है और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

इस विटामिन की कमी से होने वाले रोग

-एक वयस्क व्यक्ति को तो आहार से विटामिन-के की आपूर्ति हो जाती है, लेकिन नवजात शिशु इसकी कमी का शिकार होते हैं, इसलिए उन्हें विटामिन-के का इंजेक्शन लगाना जरूरी हो जाता है। कुपोषण का शिकार, शराब पीने वाले, गॉल ब्लेडर, हृदय रोग से पीड़ित, पतला होने की चाह रखने वाले व्यक्तियों को भी विटामिन-के सप्लिमेंट दिए जा सकते हैं।

-कई बार विटामिन-के की कमी के पीछे पौष्टिक आहार का सेवन न करने या भोजन में समुचित मात्रा में वसायुक्त भोजन न करने का भी हाथ रहता है। वसा इस विटामिन-के अवशोषण या चयापचय के लिए आवश्यक होती है। इसके अलावा स्पेक्ट्रम, एस्पिरिन या कुनैन जैसी एंटीबायोटिक, कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाली दवाओं का सेवन करते समय भी शरीर में विटामिन-के की कमी हो जाती है।

विटामिन-के के स्त्रोत

विटामिन-के-1 विशेष रूप से गोभी, पत्ता गोभी, साग, पालक, ब्रोकली जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों, टमाटर, लाल-पीली शिमला मिर्च, कीवी, ब्लूबेरी, अंगूर, स्ट्रॉबेरी जैसे फलों, स्प्राउट्स, सोयाबीन, दही, चीज, पनीर, ग्रीन टी, ऑलिव ऑयल आदि में पाया जाता है। विटामिन-के-2 चिकन, सामन मछली, अंडे से प्राप्त होता है। इसके अलावा शिशुओं में इसकी कमी को पूरा करने के लिए एक अन्य प्रकार का सिंथेटिक विटामिन-के-3 भी है, जिसे इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है।

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