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UAPA बिल लोकसभा से पास, विरोध में कांग्रेस का वॉक आउट

लोकसभा में विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन (UAPA) बिल को वोटिंग के बाद पास कर दिया गया. बिल को पक्ष में 287 जबकि विपक्ष में सिर्फ 8 वोट पड़े.


कांग्रेस के सांसद अधीर रंजन चौधरी ने बिल को जरूरी बताते हुए इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग की, उन्होंने कहा कि सरकार अहम विधेयकों की भी निगरानी नहीं चाहती है. चौधरी ने कहा कि पोटा के दुरुपयोग के खिलाफ आडवाणी जी आवाज उठा चुके हैं. उन्होंने कहा कि अक्षरधाम से लेकर पुलवामा तक आतंकी घटनाएं हुई हैं. उन्होंने कहा कि आतंकियों के खिलाफ लाए गए अहम कानून की संसदीय समिति की ओर से निगरानी होनी चाहिए. अगर ऐसे आप बिल को पारित कराने की कोशिश करेंगे तो हम इसका विरोध करेंगे. कांग्रेस सांसदों ने बिल के खिलाफ सदन से वॉक आउट कर दिया है.

अमित शाह ने कहा कि अगर पुलिस के पकड़ने पर जिम्मेदारी तय करोगे तो कोई क्यों किसी को पकड़ेगा. न्याय कहता है कि पुलिस ने पकड़ा लेकिन साबित कोर्ट करेगा, वह दोषी है या नहीं, वरना छूट जाएगा. अब इसके लिए दोषी कौन है, देश में फिर पुलिस की क्या जरूरत है. गृह मंत्री ने बिल पर बोलते हुए कहा कि अगर कोई भी आतंकी गतिविधि करेगा तो उसके कम्प्यूटर में पुलिस जरूर घुसेगी और घुसना भी चाहिए. उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं को सरकार पूरा सम्मान देती है लेकिन अर्बन माओवाद के लिए काम करने वालों के साथ हमारी जरा भी संवेदना नहीं है. उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद पहले वैचारिक आंदोलन था जिसने हजारों लोगों की जान ले ली. वैचारिक आंदोलन का चोला पहनकर वामपंथी उग्रवाद फैलाने वालों के लिए सरकार के मन में जरा भी दया नहीं है और उनपर कठोर कार्रवाई की जाएगी. अनपढ़ और गरीब लोगों को हाथ में बंदूक पकड़ा दी जाती है. अगर कानून में सजा नहीं हो पाती है तो उसे खत्म कर देना विकल्प नहीं है.

अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि बार-बार संगठन खड़ा करने वालों को आतंकी घोषित कर उनका क्रूर चेहरा पूरी दुनिया में दिखाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को लागू करने के दौरान काफी सावधानियां बरतीं गई हैं. उन्होंने कहा कि यासीन भटकल को आतंकी घोषित नहीं किया गया और कर दिया होता तो 12 बम धमाके बच जाते क्योंकि वो अलग नाम से काम करते रहे. पुलिस को कुर्की का अधिकार नहीं है और वह सिर्फ संपत्ति अटैच कर सकती है, कोर्ट के आदेश पर ही कुर्की संभव है. उन्होंने कहा इस कानून से संघीय ढांचे को किसी भी तरह से चोट नहीं पहुंचेगी, इंस्पेक्टर को जांच का अधिकार दिया है और उस जांच की बड़े अधिकारी निगरानी करेंगे, मकसद सिर्फ इतना है कि जल्द से जल्द जांच हो और दोषियों को सजा दिलाई जा सके. अगर पुलिस किसी को पकड़ती है तो 24 घंटे में कोर्ट के सामने पेशी होगी लेकिन रिमांड 14 दिन की जगह 30 दिन की दी जाएगी, क्योंकि NIA के मामले काफी जटिल होते है.


कानून के दुरुपयोग के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि इस बिल में प्रावधान हैं कि किसी व्यक्ति को कब आतंकी घोषित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद बंदूस से नहीं बल्कि प्रचार और उन्माद से पैदा होता है. ऐसा करने वालों को आतंकी घोषित करने में किसी को आपत्ति क्यों है. उन्होंने कहा कि अपील के लिए विकल्प खुले हैं और अफसर बैठते हैं, जो किसी सरकार के निर्देशों पर नहीं चलते. जो लोग यूपीए के दौरान हमारे खिलाफ जांच कर रहे थे वही आज एनआईए में कार्यरत हैं, तब उनपर भरोसा था तो आज क्यों नहीं है. अगर अफसर सरकार का दबाव में भी हो तो भी रिव्यू कमेटी का विकल्प भी खुला है, इसके बाद कोर्ट में जाने का भी ऑप्शन है. अमित शाह ने कहा कि अगर व्यक्ति के मन में आतंकवाद है तो संगठन को बैन करने से कुछ नहीं होगा, तब वह नया संगठन बना लेगा, इस वजह से व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का प्रावधान जरूरी है. अमेरिका, यूएन, चीन, इजरायल और पाकिस्तान जैसे देश में भी यह प्रावधान है.

अगर कानून में सजा नहीं हो पाती है तो उसे खत्म कर देना विकल्प नहीं है.


अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि बार-बार संगठन खड़ा करने वालों को आतंकी घोषित कर उनका क्रूर चेहरा पूरी दुनिया में दिखाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को लागू करने के दौरान काफी सावधानियां बरतीं गई हैं. उन्होंने कहा कि यासीन भटकल को आतंकी घोषित नहीं किया गया और कर दिया होता तो 12 बम धमाके बच जाते क्योंकि वो अलग नाम से काम करते रहे. पुलिस को कुर्की का अधिकार नहीं है और वह सिर्फ संपत्ति अटैच कर सकती है, कोर्ट के आदेश पर ही कुर्की संभव है. उन्होंने कहा इस कानून से संघीय ढांचे को किसी भी तरह से चोट नहीं पहुंचेगी, इंस्पेक्टर को जांच का अधिकार दिया है और उस जांच की बड़े अधिकारी निगरानी करेंगे, मकसद सिर्फ इतना है कि जल्द से जल्द जांच हो और दोषियों को सजा दिलाई जा सके. अगर पुलिस किसी को पकड़ती है तो 24 घंटे में कोर्ट के सामने पेशी होगी लेकिन रिमांड 14 दिन की जगह 30 दिन की दी जाएगी, क्योंकि NIA के मामले काफी जटिल होते है.


कानून के दुरुपयोग के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि इस बिल में प्रावधान हैं कि किसी व्यक्ति को कब आतंकी घोषित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद बंदूस से नहीं बल्कि प्रचार और उन्माद से पैदा होता है. ऐसा करने वालों को आतंकी घोषित करने में किसी को आपत्ति क्यों है. उन्होंने कहा कि अपील के लिए विकल्प खुले हैं और अफसर बैठते हैं, जो किसी सरकार के निर्देशों पर नहीं चलते. जो लोग यूपीए के दौरान हमारे खिलाफ जांच कर रहे थे वही आज एनआईए में कार्यरत हैं, तब उनपर भरोसा था तो आज क्यों नहीं है. अगर अफसर सरकार का दबाव में भी हो तो भी रिव्यू कमेटी का विकल्प भी खुला है, इसके बाद कोर्ट में जाने का भी ऑप्शन है. अमित शाह ने कहा कि अगर व्यक्ति के मन में आतंकवाद है तो संगठन को बैन करने से कुछ नहीं होगा, तब वह नया संगठन बना लेगा, इस वजह से व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का प्रावधान जरूरी है. अमेरिका, यूएन, चीन, इजरायल और पाकिस्तान जैसे देश में भी यह प्रावधान है.