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रांची

झारखंड में पहली बार रिम्स में शुरू हुई एंटीबॉडी जांच, कोरोना मरीजों के उपचार में मिलेगी मदद

रांची 31 जुलाई 2020 City On Click:

रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अत्याधुनिक लेबोरेटरी में अब एंटीबॉडी टेस्ट की सुविधा बहाल हो गई है। विभाग के एचओडी डॉ मनोज कुमार ने बताया कि राज्य का यह पहला लैब है जहां एंटीबॉडी जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। डॉ कुमार ने बताया कि एंटीबॉडी जांच शुरू हो जाने से न सिर्फ कोरोना मरीजों के उपचार में मदद मिलेगी बल्क, रूबेला, मिजल्स समेत अन्य संक्रामक रोगों के निदान में भी काफी मदद मिलेगी। यही नहीं, कोरोना के गंभीर मरीजों के उपचार में जिस प्लाज्मा की महत्वपूर्ण भूमिका है, उस प्लाज्मा के क्वालिटी कंट्रोल की पूरी जिम्मेदारी इसी माईक्रोबायोलॉजी के ऊपर है। डॉ मनोज कुमार ने बताया कि प्लाज्मा डोनेट करने से पूर्व डोनर के 24 घंटे के अंदर निगेटिव होने की जांच भी माईक्रोबायोलॉजी विभाग में की जाएगी।

एंटीबॉडी जांच में देखी जाएगी उसकी वैल्यू : डॉ मनोज कुमार ने बताया कि किसी भी व्यक्ति का प्लाज्मा लेने से पहले उसके ब्लड सीरम से एंटीबॉडी की जांच की जाती है। मरीज को प्लाज्मा चढ़ाने से पहले डोनेट किए गए प्लाज्मा में एंटीबॉडी के वैल्यू की जांच की जाती है। इस वैल्यू के आधार पर ही इसका असर भी निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि प्लाज्मा चढ़ाने से अति गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने में मदद मिल सकती है, जबकि मध्यम रूप से बीमार मरीजों की रिकवरी तेज हो जाएगी।

सिरो सर्विलेंस के लिए अब बाहर नहीं भेजना होगा सैंपल : रिम्स में एंटीबॉडी जांच शुरू हो जाने के बाद अब राज्य में कम्युनिटी स्प्रेड का पता लगाने के लिए बाहर भेजकर सैंपलों की जांच नहीं करानी होगी। राज्य में सैंपल कलेक्ट किए जाने के बाद रिम्स के माईक्रोबायोलॉजी विभाग में ही उसकी जांच हो सकेगी। इससे पहले मई जब राज्य के 10 जिलों में सिरो सर्वे कराया गया था तो सभी जिलों से सैंपल कलेक्ट कर आईसीएमआर द्वारा उसे कोलकाता भेजकर जांच करायी गई थी।