झारखण्ड

ऑन द स्पॉट होगा 53 मामलों का निष्पादनः जिला जज


रामगढ़। रामगढ़ जिले में पहली बार लोक अदालत ऑन द स्पॉट आयोजित किया जाएगा। मौके पर 53 मामलों का निष्पादन किया जाएगा। यह बात प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्वर्ण शंकर प्रसाद ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि आमतौर पर स्थाई लोक अदालत में मामलों का निष्पादन होता था, लेकिन इस बार बैंक ऑफ इंडिया के कर्मा शाखा में लोक अदालत लगाया जाएगा।
ऐसा पहली बार हो रहा है जब बैंकों के अधिकारी और उनके ग्राहक बैंक में ही आमने-सामने होंगे। 3 एवं 4 जनवरी को यह फैसला लोक अदालत के जज के द्वारा सुनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब तक लोक अदालत में 736 मामलों का निष्पादन हो चुका है। 680 मामले अभी लंबित हैं जिनका निष्पादन निकट भविष्य में लगने वाले लोक अदालत में किया जाएगा। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्वर्ण शंकर प्रसाद ने कहा कि कई ऐसे मामले हैं, जो इसलिए लंबित रह जाते हैं, जिसमें अधिकारियों और ग्राहकों के बीच खुले रूप से संवाद नहीं हो पाता है।
लोक अदालत उन ग्राहकों को एक बेहतर मंच उपलब्ध कराता है। जिसमें वे खुलकर अपनी समस्या रखते हैं। इस मौके पर बैंक के अधिकारी अपने कर्मचारियों से और ग्राहकों से जो वादा करेंगे, उन्हें वह हर हाल में पूरा करना होगा। अगर वे कानून का उल्लंघन करेंगे, तो इस मामले को लोक अदालत के जज आगे भी ले जा सकते हैं। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बताया कि लोक अदालत अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिन्हा, सदस्य अभय कुमार एवं स्वप्ना शबनम नंदी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहा है। लोक अदालत, झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अंतर्गत उनके दिशा-निर्देशों पर कार्य कर रहा है।
लोक अदालत की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जन उपयोगी सेवाएं जैसे बैंक, बीमा कंपनी, पोस्ट ऑफिस, टेलीफोन, बिजली, रेल, सड़क, वायु ट्रांसपोर्ट, नगर निगम, शैक्षणिक संस्थाएं एवं भवन निर्माण से संबंधित वादों का निष्पादन न्यायालय में वाद दायर करने के पूर्व सुलह के आधार पर करना है, जिससे व्यवहार न्यायालय में मुकदमों का बोझ कम हो सके। स्थाई लोक अदालत दोनों पक्षों की सहमति के किसी वाद में निर्णय भी पारित कर सकता है, जो दोनों पक्षकारों पर बाध्यकारी होता है। इसके द्वारा पारित निर्णय अंतिम है एवं इसके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती है। स्थाई लोक अदालत में शिकायतकर्ता किसी न्यायालय में केस दर्ज कराने के पूर्व अपनी समस्या के निदान के लिए अपील कर सकते हैं।