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12 साइबर क्रिमिनल देवघर में गिरफ्तार, जानें कैसे करते थे लोगों से ठगी

देवघर 23 नवंबर 2020 City On Click:

देवघर जिले के साइबर ठगों पर पुलिस लगातार शिकंजा कस रही है। पुलिस की छापेमारी में विभिन्न थाना क्षेत्रों से साइबर ठग दबोचे जा रहे हैं। पुलिस ने फिर से सगे भाई समेत 12 साइबर क्रिमिनल को गिरफ्तार किया है। एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा के निर्देश पर अलग-अलग 2 टीम गठित कर छापेमारी की गयी। गिरफ्तार साइबर क्रिमिनल के पास से पुलिस ने बोलेरो वाहन सहित बुलेट, स्कूटी, 22 मोबाइल, 32 सिम कार्ड, 9 पासबुक, 8 एटीएम कार्ड, 2 चेक बुक व एक लैपटॉप जब्त किया है।

सोमवार को पुलिस कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि मारगोमुंडा सहित देवीपुर एवं खागा क्षेत्र में कुछ युवक एक साथ जुटकर साइबर ठगी कर रहे हैं। इसी आधार पर मुख्यालय डीएसपी मंगल सिंह जामुदा, सारठ एसडीपीओ अमोद नारायण सिंह एवं प्रशिक्षु आइपीएस सह सारठ थाना प्रभारी कपिल चौधरी के नेतृत्व में अलग-अलग 2 टीम गठित कर छापेमारी की गयी।

पहली टीम ने मारगोमुंडा थाना क्षेत्र के केंदुआटांड़ एवं देवीपुर थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव से 6 साइबर क्रिमिनल को गिरफ्तार किया। वहीं, दूसरी टीम ने खागा थाना क्षेत्र के शिमला व खागा थाना क्षेत्र से भी 6 साइबर क्रिमिनल को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार साइबर क्रिमिनल में देवीपुर थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव निवासी दो सगे भाई पवन दास व उदय दास, मारगोमुंडा थाना क्षेत्र के केंदुआटांड़ निवासी रमेश मंडल, देवेंद्र मंडल, छत्रधारी मंडल, निर्मल मंडल, खागा थाना क्षेत्र के कांकी गांव निवासी अनवर अंसारी, शमीम अंसारी, मुजफ्फर अंसारी, सरफुद्दीन अंसारी और खागा थाना क्षेत्र के ही शिमला गांव निवासी रंजीत पंडित, मुरारी गोस्वामी शामिल हैं। एसपी ने बताया कि बोलेरो वाहन एवं बुलेट केंदुआटांड़ निवासी रमेश के पास से जब्त किया गया. गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है।

इन साइबर क्रिमिनल अलग-अलग तरीके से करते हैं ठगी

एसपी के मुताबिक, पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि साइबर ठगी में उक्त सभी अलग- अलग तरीके अपनाते हैं। मोबाइल से कॉल कर खुद फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को एटीएम बंद होने एवं चालू कराने का झांसा देकर ओटीपी की जानकारी लेते हैं और अकाउंट से रुपये उड़ा लेते हैं। केवाइसी अपडेट कराने के नाम पर भी लोगों से ओटीपी व आधार नंबर की जानकारी लेकर संबंधित ग्राहक के आधार लिंक अकाउंट से पैसे उड़ा लेते हैं। फोन-पे, पेटीएम में मनी रिक्वेस्ट भेजकर सबंधित ग्राहकों से ओटीपी की जानकारी लेने के बाद रुपये की ठगी कर लेते हैं।

इसके अलावा गूगल पर विभिन्न प्रकार के वॉलेट बैंक की फर्जी कस्टमर केयर नंबर का विज्ञापन देकर आमलोगों को मदद का झांसा देकर अकाउंट से रुपये उड़ाते हैं। इसके अलावा टीम व्यूवर एवं क्विक स्पोर्ट जैसे रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल कराकर गूगल पर मोबाइल नंबर का पहला 4 डिजिट सर्च कर अपने मन से 6 डिजिट जोड़कर ग्राहकों को कॉल कर फंसाते हैं और साइबर ठगी करते हैं।